पठानकोट अटैक:जानिए फर्ज की खातिर कुर्बान हो गए ये 7 जवान

0
444

पठानकोट: पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले में अब तक 7 जवानों के शहीद होने की खबर है। देश के लिए जान लुटाने वाले इन जवानों को पूरा देश नमन कर रहा है। क्लिक करके आप भी देखिए इन वीरों को, जिन्होंने दे दी अपनी जान की कुर्बानी.

NIRANJAN01 एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन पी कुमार ने रविवार सुबह अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह एक आतंकवादी की लाश को अपने कब्जे में करने की कोशिश कर रहे थे कि तभी शव में लगे IED में ब्लास्ट होने से वह घायल हो गए थे।

FATEH SINH02 स्वर्णपदक विजेता पूर्व अंतरराष्ट्रीय राइफल निशानेबाज सूबेदार मेजर (सेवानिवृत्त) फतेह सिंह शनिवार को पठानकोट में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए। 51 साल के फतेह सिंह डिफेंस सिक्यॉरिटी कोर का हिस्सा थे, और फिलहाल, डोगरा रेजिमेंट के साथ थे।

GUR SEWAK03 गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह शुरुआती गोलीबारी का निशाना बने और शहीद हो गए। गोली लगने के बावजूद उन्होंने लड़ाई जारी रखी और मेडिकल हेल्प पहुंचने से पहले ही प्राण त्याग दिए। अंबाला के रहने वाले गुरुसेवक सिंह की शादी डेढ़ महीने पहले 18 नवंबर को हुई थी।

KULLWANT SINGH04 शहीद होने वाले जवानों में गुरदासपुर के हवलदार कुलवंत सिंह भी शामिल हैं। वह कुछ दिन की छुट्टी पर घर गए थे, और 29 दिसंबर को ही ड्यूटी पर एयरफोर्स स्टेशन लौटे थे। काहनूवान के गांव चक्क शरीफ के कुलवंत सिंह की दिली ख्वाहिश थी कि उनकी तरह उनका बेटा भी आर्मी में जाए। 12वीं में पढ़ रहे अपने बेटे से आखिरी मुलाकात में उन्होंने उसे लैपटॉप गिफ्ट किया था और कहा था कि नए साल पर आकर बाइक दिलवाएंगे, लेकिन किसे पता था कि यह शहीद के अपने बेटे से आखिरी मुलाकात होगी।

JAGDISH05 हवलदार जगदीश चंद्र रसोई में नाश्ता बना रहे थे, कि तभी आंतकियों ने हमला कर दिया। इस वीर सिपाही ने न केवल बिना हथियार आतंकियों का पीछा किया, बल्कि उन्हीं के हथियार से एक आतंकी को मार गिराया और शहीद हो गए। 48 साल के जगदीश हिमाचल में चंबा के गोला गांव से थे। 2009 में डोगरा रेजिमेंट से रिटायर होने के बाद उन्होंने डीएससी जॉइन किया। कुछ महीने पहले ही उनका ट्रांसफर लेह से पठानकोट के लिए हुआ था। वह 10 दिन की छुट्टी पर अपने गांव गए थे और हमले से एक दिन पहले ही ड्यूटी पर वापस लौटे थे।

SAJIVAN RANA06 डिफेंस सिक्यॉरिटी कॉर्प्स में ही हवलदार संजीवन सिंह राणा 50 साल के थे। वह कांगड़ा में शाहपुर के सियुंह गांव से थे। हमले में बुरी तरह घायल होने के बाद वह शहीद हो गए। 2007 में डोगरा रेजिमेंट से रिटायर होने के बाद वह डीएससी में आए। 2 साल पहले उन्हें जम्मू से पठानकोट एयरबेस में ट्रांसफर किया गया था। यह शहीद अपने पीछे पत्नी, 2 बेटियां और एक बेटा छोड़ गया है।

MOHIT07 इन शहीदों में हवलदार मोहित चंद का नाम भी शामिल है, जिन्होंने फर्ज की खातिर दिलेरी से लड़ते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी।
इन शहीदों को शत-शत नमन!