अब भारत के हाथ लगा पाक को बेनकाब करने का ‘पक्का’ सबूत, ISI का अफसर है सलाहुद्दीन

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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक नया दस्तावेज हासिल किया है, जो पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के साथ आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन की निकटता की पुष्टि करता है।

दरअसल, पाकिस्तान की खुफिया निदेशालय, इस्लामाबाद की ओर से हाल ही में जारी दस्तावेज भारतीय एजेसिंयों के हाथ लगे हैं। दस्तावेज के मुताबिक, प्रतिबंधित आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिदीन का प्रमुख सैयद मुहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन ‘आधिकारिक तौर पर’ पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई के साथ काम कर रहा है।

ISI का अधिकारी है सलाहुद्दीन!

निदेशक/कमांडिंग अधिकारी वजाहत अली खान के नाम से जारी पत्र में कहा गया है, ‘यह प्रमाणित है कि सैयद मुहम्मद यूसुफ शाह, इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई, इस्लामाबाद) के साथ काम कर रहे हैं। वह इस विभाग के अधिकारी हैं। सलाहुद्दीन के वाहन का विवरण साझा करते हुए निर्देश है कि उन्हें सुरक्षा की मंजूरी दे दी गई है और अनावश्यक रूप से रोका नहीं जाना चाहिए।’ इस पत्र में यूसुफ शाह को हिजबुल मुजाहिदीन का अमीर यानी मुखिया बताया गया है। सलाहुद्दीन के लिए जारी किया पत्र 31 दिसंबर, 2020 तक मान्य है।

यूनाइटेड जिहाद काउंसिल का हेड है सलाहुद्दीन

सलाहुद्दीन यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (UJC) का हेड भी है। ये संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी नेटवर्क का सामूहिक गिरोह है और पाकिस्तान के निर्देश पर काम करता है। 6 मई 2020 को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों सैयद शकील यूसुफ और सैयद शहीद यूसुफ को गिरफ्तार किया है, जबकि उसके दो गुर्गों रियाज नायकू और आदिल अहमद को मार गिराया गया है। इसके बाद सलाहुद्दीन बौखलाया हुआ है और भारत पर चोट करने की फिराक में है।

आतंकी सैयद सलाहुद्दीन भारत में आतंकी गतिविधियों को अजाम देने के लिए JKART (Jammu and Kashmir Affectees Relief Trust) नाम का संगठन बना रखा है। इस संगठन का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को भेजने और उन्हें आर्थिक मदद मुहैया कराने में किया जाता है। इसका मुख्यालय रावलपिंडी में है और इसकी शाखाएं इस्लामाबाद, मुजफ्फराबाद और दूसरे शहरों में हैं।

FATF में पाक की मुश्किल बढ़ाएगा यह दस्तावेज

भारत में कई हमलों के लिए जिम्मेदार प्रतिबंधित आतंकी संगठन के ‘आईएसआई के साथ संबंधों’ के स्पष्ट प्रमाण मिलने से भारतीय एजेंसियां बहुत उत्साहित हैं। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि इस दस्तावेज से फाइनैंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) में पाकिस्तान को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने में मजबूती मिलेगी।

अक्टूबर में होनी है FATF की समीक्षा बैठक

अक्टूबर में इस बात की समीक्षा की जानी है कि पाकिस्तान फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स के ऐक्शन प्लान को लागू करने में कितना सफल रहा है। इससे पहले इस्लामाबाद की तरफ से विशेष रूप से आतंकवाद की फंडिंग किए जाने, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का लगातार समर्थन करने और सरकारी संस्थाओं की तरफ से आतंकवाद को दिए जाने वाले सक्रिय समर्थन के बढ़ने के प्रमाण मिल गए हैं।

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