सोनिया गांधी ने आर्थिक पैकेज के नाम पर सरकार पर साधा निशाना, विपक्षी पार्टिया दिखी अलग अलग

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दिल्‍ली. कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज को जनता के साथ क्रूर मजाक करार दिया है. उन्‍होंने आरोप लगाया कि सरकार संघवाद की भावना के खिलाफ काम कर रही है और सारी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय तक सीमित हो गई हैं. वह शुक्रवार को कांग्रेस समेत 22 विपक्षी दलों की बैठक की अध्‍यक्षता कर रही थीं. लेकिन इस बड़ी बैठक में विपक्ष की बंटा हुआ दिखाई दिया.

सपा, बसपा और आप रहे दूर
विपक्ष की इस बड़ी बैठक से समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) दूर रहे. वहीं आम आदमी पार्टी भी इसमें दिखाई नहीं दी. इस पर कांग्रेस ने कहा कि आम आदमी पार्टी पहले ही विपक्ष का हिस्‍सा नहीं रहना चाहती थी, तो उसे आमंत्रि नहीं किया गया था. वही बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगा चुकी है.

विपक्ष ने की बैठक
शुक्रवार को वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के माध्यम से विपक्ष ने कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर चर्चा की. इस बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा को मदद दी जाए. चर्चा की शुरुआत से पहले नेताओं ने दो मिनट का मौन रख ‘अम्फान’ चक्रवात के कारण मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी

सरकार लॉकडाउन के मापदंडों को लेकर निश्चित नहीं थी: सोनिया
बैठक में कांग्रेस समेत 22 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए, हालांकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इस बैठक से दूर रहीं. सूत्रों के मुताबिक बैठक में श्रमिकों के मुद्दे पर मुख्य रूप से चर्चा की गई. बैठक में सोनिया कहा, ‘मेरा मानना है कि सरकार लॉकडाउन के मापदंडों को लेकर निश्चित नहीं थी. उसके पास इससे बाहर निकलने की कोई रणनीति भी नहीं है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा करने और फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पांच दिनों तक इसका ब्यौरा रखे जाने के बाद यह एक क्रूर मजाक साबित हुआ.

की हैं ये मांगें
सोनिया गांधी के मुताबिक, ‘हममें से कई समान विचारधारा वाली पार्टियां मांग कर चुकी हैं कि गरीबों के खातों में पैसे डाले जाएं, सभी परिवारों को मुफ्त राशन दिया जाए और घर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों को बस एवं ट्रेन की सुविधा दी जाए. हमने यह मांग भी की थी कि कर्मचारियों एवं नियोजकों की सुरक्षा के लिए वेतन सहायता कोष बनाया जाए. लेकिन हमारी गुहार को अनसुना कर दिया गया.

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