JNU में हमले को लेकर वामपंथी-एबीवीपी आमने-सामने,वर्ल्ड मीडिया ने ऐसे किया पेश

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में रविवार को मारपीट की घटना हुई। कई नकाबपोशों ने कैंपस में छात्रों और शिक्षकों को जमकर पीटा। इस घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। देखते ही देखते घटना की खबर आग की तरह फैल गई। विपक्ष ने सरकार पर चौतरफा वार किए। ऐसे में दुनियाभर के मीडिया समूहों को इस मामले में खबर को अलग-अलग तरीके से कवर किया।

बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में रविवार शाम हिंसा हुई इस हिंसा में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष पर भी हमला हुआ। यह हमला जेएनयू कैंपस के भीतर हुआ। टीवी रिपोर्ट्स के अनुसार नकाबपोश हमलावरों ने कई हॉस्टलों में जाकर हमला किया। चश्मदीदों का कहना है कि जेएनयू कैंपस में 50 से ज्यादा लोग घुस आए, जिन्होंने डंडे और लाठियां ले रखी थीं। अधिकांश ने अपने चेहरे पर कपड़े बांधे हुए थे। कैंपस में दाखिल होते ही इन लोगों ने छात्रों पर हमला शुरू कर दिया।इस हमले में कई छात्र जख्मी हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के मेन गेट पर भारी पुलिस दल तैनात कर दिए हैं। वहीं, जेएनयू के गेट के बाहर और आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि नकाबपोशों ने जेएनयू कैंपस में कोहराम मचा दिया। हमलावर हिंदूवादी नारे लगा रहे थे , उनके हमले में दर्जनों लोग घायल हुए। कुछ छात्रों ने पुलिस पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि ये नकाबपोश कैंपस में शाम 7 से 8 बजे के बीच घुसे। मारपीट और तोड़फोड़ करने वाले ये लोग ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगा रहे थे। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत में धार्मिक ध्रुवीकरण हो रहा है।

अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जेएनयू कैंपस में एबीवीपी द्वारा किए गए कथित हमले में कई छात्र और शिक्षक घायल हुए है । चश्मदीदों ने कहा कि रविवार को जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने होस्टल फीस बढ़ाने के मुद्दे पर मीटिंग बुलाई थी। इसी दौरान कुछ लोग लाठी-डंडा लेकर पहुंचे और हिंसा शुरू कर दी। जेएनयू छात्र संघ पर वामपंथ समर्थक संगठन का कब्जा है। इसकी अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई छात्र हमले में घायल हो गए। जेएनयू छात्रों ने हिंसा का आरोप भाजपा संबंधित संगठन एबीवीपी पर लगाया है।

ब्लूमबर्ग ने खबर में लिखा कि यूनिवर्सिटी में छात्रों पर हमले के बाद देशभर में तनाव बढ़ गया है। नकाब पहने कुछ बदमाशों ने रविवार को जेएनयू कैंपस में छात्रों के साथ मारपीट की। घटना के समय कैंपस में वामपंथी छात्र संगठन मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। वामपंथी छात्र समूहों ने एबीवीपी पर हिंसा करने का आरोप लगाया है। वहीं, एबीवीपी ने इससे इनकार करते हुए कहा कि हिंसा में उनके सदस्य भी घायल हुए हैं। एबीवीपी का संबंध भाजपा से है।

द गार्जियन ने अपनी खबर में लिखा कि जेएनयू कैंपस में नकाबपोशों ने हमला किया, इस हमले में 23 छात्र घायल हुए। मामले से जुड़े एक वीडियो में कुछ लोग कैंपस में लाठी-रॉड लेकर घूमते हुए नजर आ रहे हैं। इन नकाबपोशों ने छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की। जेएनयू के छात्र बीते कुछ दिनों से  फीस बढ़ोतरी और नागरिकता कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। वामपंथी छात्र समूह ने प्रधानमंत्री मोदी की भाजपा से जुड़े गुंडों को हिंसा के लिए जिम्मेदार बताया है। जबकि भाजपा और एबीवीपी ने वामपंथी छात्रों पर इस हिंसा का आरोप लगाया है।

सीएनएन ने अपनी खबर में लिखा कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जेएनयू, हिंसा के बाद एक किले में तब्दील हो गया। यहां के प्रवेश और निकासी द्वार पर कई पुलिसवाले तैनात हैं। जेएनयू के कुछ छात्रों का कहना है कि रविवार को इस तरह की सुरक्षा कहीं नहीं दिखाई दी जब नकाबपोश हमलावर हाथों में लाठी और लोहे की रॉड लिए कैंपस के अंदर आए थे और छात्रों एवं अध्यापकों पर हमला किया। पुलिस के अनुसार इस हमले में लगभग 34 लोग घायल हुए हैं। छात्रों ने पुलिस पर हस्तक्षेप करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

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