उन्नाव रेप कांड:-अब फांसी दूर नहीं!

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प्रयागराज/इलाहाबाद:(अली इशरत)पीडिता दोवारा 35 बार पुलिस को शिकायत पत्र प्रेषित किया गया,सीजेआई (चीफ जस्टिस आफ इंडिया) को पत्र लिखा गया जिस पर सीजेआई ने फटकार भी लगाई गई है , लेकिन उनके  द्द्वारा कोइ  एक्शन लिए जाने बात सामने नहीं आई कि आखिर उन्हें लेटर इतनी देर क्यों पहुंचाया गया .बेटी बचाओ वाले प्रधानमंत्री जी को 170 ट्वीट किए गए पर किसी ने पीड़िता की आवाज़ न सुनी.पर हाँ सीजेआई के एक्शन लिए जाने के बाद  बीजेपी अपने ही विधायक के खिलाफ 788 दिन बाद एक्शन लेने पर मजबूर हूई.

लेखक अली इशरत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दिल्ली महिला आयोग कीअध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने खुशी ज़ाहिर की है . उन्हों ने टिवीट कर कहा कि…. देश के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षर में लिखा जाएगा . उन्नाव रेप पीडिता के केस में CBI को जांच 7 दिन में पूरी करनी होगी और डेली हियरिंग करके 45 दिन में पूरा केस ख़तम किया जायेगा . अब कुलदीप सेंगर को फांसी दूर नहीं है . दिल से धन्यवाद CJI रंजन गोगोई जी को … 

उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला देने वाले उन्नाव गैंगरेप मामले में बीजेपी ने अपने विधायक और इस केस के मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ आखिरकार 788 दिन बाद एक्शन लिया है. भारतीय जनता पार्टी ने आज उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है. उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता ने 4 जून 2017 को आरोप लगाया था कि उसका बीजेपी के विधायक कुलदीप सेंगर के घर पर बलात्कार किया गया. पीड़िता ने कहा था कि वह अपने एक पड़ोसी के साथ नौकरी दिलाने में मदद के लिए विधायक के पास गई थीं जब उनके साथ वहां रेप किया गया.

सेंगर के खिलाफ आरोप लगने के बाद से ही विपक्षी पार्टियां बीजेपी से सेंगर को पार्टी से निकालने की मांग कर रही थी, लेकिन बीजेपी इस मामले पर कुछ भी कहने से अब तक बच रही थी लेकिन आखिरकार 788 दिन बाद बीजेपी अपने ही विधायक के खिलाफ एक्शन लेने पर मजबूर हुई. ऐसे में आइए जानते हैं इस केस में अब तक क्या क्या हुआ है.

1- लड़की ने आरोप लगाया कि 4 जून 2017 को विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथरेप किया.
2-रेप पीड़िता और बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर एक ही गांव मांखी में रहते है.
3- ये गांव लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर उन्नाव जिले के मियागंज ब्लाक में पड़ता है.
4- दोनों ही ठाकुर बिरादरी के है और गाँव में घर भी आस पास है .
5- 11 जून 2017 को रेप पीड़िता गांव के ही एक लड़के शुभम सिंह के साथ गायब हो गयी.
6-इस मामले में उसके घरवालों ने शुभम और अवधेश तिवारी पर मुकदमा दर्ज किया  .
7-21 जून को लड़की बरामद हो गयी.अगले दिन पीड़िता ने कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि ब्रजेश यादव, अवधेश और शुभम ने उसके साथ गैंग रेप किया
8- तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए. सभी आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर के समर्थक बताये जाते हैं. 1 जुलाई 2017 को इस केस में चार्जशीट दायर हुई.
9- 22 जुलाई को पीड़िता ने पीएम से लेकर सीएम ऑफिस को चिट्ठी लिख कर बताया कि विधायक ने भी उसका रेप किया है.
10- पीड़िता ने उन्नाव के एसपी से लेकर कई बड़े पुलिस अफसरों को भी ये बात बतायी.
11- 30 अक्टूबर को विधायक के लोगों ने पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ मांखी थाने में मानहानि का केस किया
12- पीड़िता के घरवालों ने विधायक को रावण बताते हुए पोस्टर लगाए थे. पीड़िता के चाचा पर भी विधायक के समर्थकों ने अलग से मानहानि का एक मुकदमा किया. ये बात 11 नवंबर की है.
13- 22 फरवरी 2018 को पीड़िता ने उन्नाव की जिला अदालत में याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ रेप किया.
14- शुभम की मां शशि सिंह नौकरी के बहाने बहला फुसला कर उसे एमएलए के यहां ले गयी थी.
15- 3 अप्रैल 2018 को जब पीड़िता के घरवाले कोर्ट में सुनवाई के बाद गांव लौट रहे थे तो एमएलए के भाई अतुल सिंह सेंगर और उनके साथियों ने उन पर हमला कर दिया. खूब पीटा और फिर डायल 100 पर फोन कर पुलिस को बुला लिया. पुलिस के सामने भी पीड़िता के पिता को पीटा
16- पुलिस बुरी तरह घायल पीड़िता के पिता को अस्पताल ले आयी. मांखी थाने ले पुलिसवालों ने पीटने वालों को पकड़ने के बदले पीड़िता के पिता पर आर्म्स ऐक्ट और मार पीट का केस कर दिया.
17- अगले दिन जब पीड़िता ने उन्नाव के डीएम से मिल कर सारी बात बतायी. विधायक के चार समर्थकों विनीत, बऊवा, शैलू और सोनू पर केस मारपीट का केस हुआ. लेकिन पुलिस ने ना तो आरोपियों को गिरफ्तार किया और ना ही विधायक के भाई पर एफआईआर किया.
18- 4 अप्रैल की शाम को पीड़िता के पिता को जेल भेज दिया गया।जेल में उनकी हालात दिन-ब-दिन खराब होती गई, 9 अप्रैल पीड़िता के पिता की मौत हो गयी. इसके बाद उन्नाव की पुलिस ने डैमेज कंट्रोल के लिए चारो आरोपियों और विधायक के भाई को गिरफ्तार कर लिया.
19- लापरवाही के आरोप में मांखी थाने के प्रभारी समेत छह पुलिस वाले निलंबित कर दिए गए. 13 अप्रैल 2018 को सीबीआई ने सुबह 4 बजे कुलदीप सेंगर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया बाद में शाम को कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया गया.
20- अगले दिन 14 अप्रैल 2018 मामले की अन्य आरोपी शशि सिंह गिरफ्तार. शशि पर आरोप नौकरी दिलाने के बहाने पीड़िता को विधायक से मिलाया.
21- 11 जुलाई 2018 को सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की. इसमें विधायक कुलदीप सेंगर का नाम था.
22- 13 जुलाई 2018 को पुलिस ने दूसरी चार्जशीट फाइल की. इसमें कुलदीप सेंगर, उसके भाई और तीन पुलिसकर्मी समेत 5 लोगों को नाम शामिल था.
23- 18 अगस्त 2018 को उन्‍नाव रेप केस में सीबीआई के मुख्‍य गवाह यूनुस की संदिग्ध हालात में मौत हो गई.
24- 28 जुलाई 2019 को रायबरेली में सड़क हादसे में पीड़िता और वकील घायल, पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई.
25- 1 अगस्त को केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया साथ ही पीड़िता और उसके घायल वकील को दिल्ली इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है. आज ही बीजेपी विधायक सेंगर को पार्टी से निकाला.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव की रेप पीड़िता (Unnao Rape Survivor)कुछ  दिन पहले हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से ज़ख्मी होने के बाद से जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है. पिछले दिनों  को हुए सड़क हादसे में पीड़िता के परिवार के दो लोगों की मौत हो गई. उधर मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है. पुलिस शिकायत में अब मामले में बीजेपी के एक और नेता के शामिल होने की बात सामने आई है. यूपी के रायबरेली में रेप पीड़िता के कार को उल्टी दिशा से आ रही ट्रक ने सामने से टक्कर मार दी थी. ट्रक का नंबर प्लेट भी मिटा हुआ था. मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

रेप पीड़िता के चाचा द्वारा की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में रेप के आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. एफआईआर में दर्ज आरोपियों के नामों के करीब से जांच करने पर पता चला है कि एक और बीजेपी नेता दुर्घटना में आरोपी है.

पीड़िता के चाचा की तरफ से दर्ज कराए गए एफआईआर में ‘आरोपी नंबर-7’ अरुण सिंह है जो बीजेपी कार्यकर्ता है और उन्नाव में एक ब्लॉक का अध्यक्ष है. अरुण सिंह आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर का भी करीबी है. 2019 लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अरुण सिंह को बीजेपी प्रमुख अमित शाह और उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज जैसे शीर्ष नेताओं के साथ फोटो और वीडियो में देखा जा सकता है.

अरुण सिंह यूपी के मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ ‘धुन्नी भैया’ के दामाद हैं. रणवेंद्र प्रताप सिंह यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में कृषि राज्य मंत्री और कृषि शिक्षा एवं शोध मंत्री हैं. रणवेंद्र सिंह फतेहपुर जिले की एक सीट से बीजेपी विधायक हैं. बता दें कि यह वही जगह है जहां के ट्रक मालिक और ड्राइवर हैं. अब तक हालांकि सिंह के दोनों में से किसी से जोड़ने का कोई सबूत नहीं है. सीबीआई की एफआईआर में भी इस बात की जिक्र है कि अरुण सिंह और कुछ और लोग रेप पीड़ित परिवार को धमका रहे थे कि वह केस वापस ले ले. उधर, रणवेंद्र सिंह ने कहा, ‘सीबीआई मामले की जांच कर रही है. जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा. वह मेरे रिश्तेदार हैं इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन यह कोई अपराध नहीं है. पीड़िता का आरोप है कि कुलदीप सिंह सेंगर और उसके सहायकों ने वर्ष 2017 में उसके साथ रेप किया था, जब वह उनके पास नौकरी मांगने गई थी. उसने अपने आरोप अप्रैल, 2018 में सार्वजनिक किए थे, जब उसने धमकी दी कि अगर पुलिस ने उसका केस दर्ज नहीं किया, तो वह लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर आत्महत्या कर लेगी.

उन्नाव एक्सीटेंड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई है . चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने इससे जुड़े सभी केस लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया है . इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई 45 दिनों में पूरी करने का निर्देश दिया है . पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की . इस दौरान कोर्ट ने इस मामले में सूबे की योगी सरकार की लापरवाही को मानते हुए पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया . इसके साथ ही कोर्ट ने सीआरपीएफ को तत्काल प्रभाव से पीड़ित परिवार के सदस्यों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया। कोर्ट का कहा कि पीडि़ता के परिवार के अलावा उन्‍नाव में रह रहे, उनके सभी संबंधियों को सुरक्षा उपलब्‍ध कराई जाए .

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 7 दिनों में हादसे की जांच पूरी करने के लिए कहा था . सुप्रीम कोर्ट ने दोपहर 2 बजे तक पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट मांगी और साथ ही कहा है कि अगर पीड़िता एयरलिफ्ट करने की हालत में है, तो उसे दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया जाए .राजधानी लखनऊ के ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसा मामला में पुलिस की लापरवाही का नया मामला सामने आया है. पीड़िता के परिवार ने दावा किया है कि पिछले एक साल से स्थानीय पुलिस को लेटर लिखकर जान के खतरा की शिकायत की जा रही थी. दावा है कि इस दौरान पीड़िता के परिवार ने इस दौरान 35 बार पुलिस को शिकायत पत्र लिखा. लेटर में बताया गया कि, उनके परिवार को विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जान का खतरा है. लेकिन पुलिस इन पत्रों को बेबुनियाद बताकर खारिज करती रही. अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए उस लेटर को पेश करने के लिए कहा है जो सीजेआई के नाम पर पीड़ित परिवार ने भेजा था. सीजेआई ने फटकार भी लगाई गई है कि लेटर को उन तक पहुंचने में देरी क्यों हुई ?

उन्नाव एस पी एम् पी वर्मा ने परिवार की इन शिकायतों को सिरे से खारिज कर दिया है और कोइ भी जांच कराना मुनासिब नहीं समझा , वह भी तब जब इस मामले ने बेहद संगीन रुख अख्तियार कर लिया और CBIभी जांच में है . ऐसे में तो सवाल उठेगा ही कि अगर समय रहते एस पी वर्मा इन शिकायतों का संज्ञान लेते तो शायद आज ये हालात न होते और समाप्त होने की कगार पर खडा यह परिवार सुरक्षित होता .  वहीं अब मामले को लेकर एडीजी का कहना है कि परिवार की तरफ से दिए गए शिकायत पत्रों की जांच कराई जाएगी. पीड़िता की तरफ से एक साल के अंदर मिलने वाली सभी शिकायतों की जांच कराई जाएगी और जो भी इसमें दोषी पाए जाएंगे उनपर सख्त कार्रवाई की जाएगी. मामले को लेकर पीड़िता ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन को लेटर लिखे थे बल्कि 12 जुलाई को एक लेटर सीजेआई को भी लिखा था जिसमें 7-8 जुलाई को भी धमकी का जिक्र किया गया है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को लिखे इस लेटर में पीड़िता के परिवार ने लिखा है कि, आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़े कुछ लोग उनके घर पर आए और कोर्ट में बयान न बदलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है .

ये सब उस समय हो रहा था जब सुरक्षा में 10 पुलिसकर्मी तैनात थे. सुरक्षाकर्मियों के तैनात होने के बाद भी अनजान लोग आकर परिवार को डरा-धमका रहे थे. पीड़ित परिवार का कहना है कि, उन्होंने सिर्फ लेटर लिखकर ही मामले की जानकारी पुलिस को नहीं दी बल्कि आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी. इसके अलावा आरोपी विधायक के गुर्गों ने जब घर आकर धमकी दी थी तो उसका वीडियो भी बनाया था. जिसे लेटर के साथ भेजा और माखी थाना प्रभारी को दिखाया. फिर भी शिकायत दर्ज नहीं की.इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने पीड़ित परिवार की तरफ से उन्हें लिखी गई चिट्ठी की जानकारी मांगी है. उन्होंने पूछा है कि 12 जुलाई को भेजी गई चिट्ठी उनके पास बढ़ाने में देर क्यों हुई है. उन्होंने रजिस्ट्रार जनरल से पीड़ित परिवार की चिंताओं पर एक नोट भी पेश करने को कहा है. गैंगरेप पीड़िता के परिजनों ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर अपनी जान का खतरा बताया था.अब तो यह भी रिपोर्ट आ गयी है कि सरकार  और पुलिस मिलकर बचा रही थी उन्नाव के बलात्कारी को .
बेटी बचाओ वाले प्रधानमंत्री जी को 170 ट्वीट किए गए पर किसी ने पीड़िता की आवाज़ न सुनी
प्रधानमंत्री जी अगर समय रहते एक पीड़ित बेटी की आवाज़ आप सुन लेते तो शायद आज वो ज़िन्दगी मौत से जंग न लड़ रही होती . आरोप है कि लगातार आरोपी पक्ष, पीड़ित पक्ष को धमका रहा था. इस बात से परेशान होकर पीड़ित पक्ष बार-बार पुलिस और प्रशासन , मुख्य मंत्री , प्रधान मंत्री और चीग जस्टिस आफ इंडिया का दरवाजा खटखटा रहा था जहां से उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा था. एक साल में करीब 33 बार उन्होंने पुलिस में शिकायत की लेकिन एक बार भी पुलिस ने जांच करना उचित नहीं समझा.इसके बाद पीड़ित पक्ष ने डराने और धमकाने आए लोगों के कुछ वीडियो भी बनाए और जुलाई की शुरुआत में एक बार फिर से पुलिस का दरवाजा खटखटाया. लेकिन उन्हें हमेशा की तरह निराशा हाथ लगी जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखी.पीड़ितों ने इस चिट्ठी में अपना पूरा दर्द लिखा और ये बताया कि किस तरह उन पर समझौते और केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है. उन्होंने इस चिट्ठी को CJI, डीजीपी समेत और भी कई जगहों पर भेजा. इसके चंद दिनों के भीतर ही ट्रक हादसा हो गया जो शक के घेरे में है.

नोट:ये लेख लेखक की निजी विचार व लेखक दोवारा इकत्रित की गई जानकारी पर है इस लेख को वर्ल्ड मीडिया टाइम्स ने बिना एडिट करे प्रकाशित किया है 

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