डीजीपी ने सभी एसएसपी-एसपी को दिये निर्देश,सड़क पर अब नहीं पढ़ी जाएगी नमाज,रोड पर धार्मिक आयोजनों पर लगेगा प्रतिबंध,

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लखनऊ:अलीगढ़ और मेरठ के बाद अब सभी जिलों में सड़क पर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब किसी भी समुदाय के कोई धार्मिक आयोजन सड़क पर नहीं होंगे, जिससे लोगों को व्यवधान हो और यातायात प्रभावित हो। अब खास मौकों पर ऐसे आयोजन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।

डीजीपी ओपी सिंह ने सभी एडीजी जोन, आइजी/डीआइजी रेंज, एसएसपी/एसपी को निर्देश दिया है कि अलीगढ़ व मेरठ की तरह सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे धार्मिक आयोजन न हों, जिससे लोगों को व्यवधान हो और यातायात प्रभावित हो। डीजीपी ने कहा कि सभी जिलों में सड़क पर नमाज पढ़ाने पर प्रतिबंध लागू कराने का निर्देश दिया गया है। निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश भी दिया गया है। बताया गया कि विशेष मौकों पर ऐसे आयोजन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

डीजीपी ने कहा है कि यह भी सुनिश्चित करायें कि किसी भी समुदाय का कोई धार्मिक आयोजन सड़क पर न हो, जिससे लोगों को व्यवधान हो और यातायात प्रभावित हो। डीजीपी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के साथ ही सभी स्थानों पर सघन चेकिंग कराने, फुट पेट्रोलिंग किये जाने व हर संदिग्ध पर कड़ी निगाह रखे जाने के निर्देश दिये गए हैं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का निर्देश भी दिया गया है।

अलीगढ़ से हुई शुरुआत:-पिछले कुछ समय से शुक्रवार के दिन सड़कों पर नमाज और मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा पाठ, आरती का नया चलन शुरू हो गया था। इससे यातायात प्रभावित होता। वहीं, शांति व्यवस्था बिगड़ने का भी खतरा बना रहता था। नौ जून को अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र में सड़क पर आरती होने से जाम लग गया था। इसके बाद डीएम चंद्रभूषण सिंह शहर में सड़क पर सभी तरह के धार्मिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाने का निर्णय ले लिया। इस संबंध में जुलाई में डीएम ने आदेश जारी कर सड़क पर नमाज व आरती पर रोक लगा दी थी।

मेरठ में एक सप्ताह से सड़क पर नमाज बंद:-गत दिनों सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कहीं-कहीं तो दूसरे समुदाय ने भी भजन-कीर्तन का कार्यक्रम शुरू कर दिया था। टकराव और न बढ़े तथा धार्मिक आयोजनों की वजह से यातायात प्रभावित न हो, इसकी खातिर मेरठ ने पहल करते हुए गत बुधवार को सभी थानों को निर्देश दिए थे कि जुमे की नमाज मस्जिद के भीतर ही पढ़ी जाए। इसके बाद जिन मस्जिदों में छतों पर जगह थी, वहां छतों पर भी नमाज पढ़ी गई और जहां यह व्यवस्था नहीं थी वहां फुटपाथ और गलियों में अकीदतमंदों ने नमाज पढ़ी।

आयोजन से पहले अनुमति अनिवार्य, जल्द जारी होंगे दिशा निर्देश

  1. बीते कई माह से उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज, हनुमान चालीसा, महाआरती जैसे कार्यक्रमों की खबरें आईं। जिससे रोड पर आवागमन प्रभावित हुआ, वहीं कई जगहों पर टकराव की स्थिति भी बनी। इसे देखते हुए बीते दिनों अलीगढ़ जिला प्रशासन व मेरठ में जिला प्रशासन ने सार्वजिक स्थानों पर धार्मिक आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया। स्पष्ट कहा कि, आयोजन से पहले अनुमति लेना अनिवार्य है।
  2. परिणाम यह रहा कि, अलीगढ़ व मेरठ में बकरीद के मौके पर प्रतिबंधित पशुओं की कटान पर लगाम लगी तो सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजन भी नहीं हुए। हालांकि बकरीद, ईद जैसे प्रमुख पर्व पर मस्जिदों के बाहर नमाज पढ़ने के लिए छूट जरुर दी गई थी।
  3. डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि, कानून व्यवस्था और जन सुविधा को प्रभावित करने वाले धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने के लिए मेरठ मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अथवा अन्य धार्मिक आयोजन पर लगाया गया प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा। इसे लेकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से जरूरी जल्द निर्देश लागू किए जाएंगे।

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