उन्‍नाव गैंगरेप:वकील का बड़ा दावा-पीड़िता के पिता की हत्‍या के जुर्म में CBI ने जानबूझकर नहीं लिया MLA का नाम

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उन्नाव गैंगरेप (Unnao Gangrape) पीड़िता के वकील ने दिल्ली की अदालत को शनिवार को बताया कि पीड़िता के पिता की हत्या मामले में सीबीआई (CBI) ने ‘जानबूझकर’ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) और उसके भाई का नाम आरोपियों के रूप में नहीं लिया. उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई पूरी किए जाने की समय सीमा 45 दिन तय की थी और इसी के अनुपालन में दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति से अदालत के अवकाश पर जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने विशेष सुनवाई की और इस दौरान यह दलील दी गई. सीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ लोक अभियोजक अशोक भारतेन्दु ने इस आरोप से इनकार किया और कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) ने मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ सबूत इकट्टा किए हैं और उनकी ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था.

13 अगस्त के लिए अदालत ने सुरक्षित रखा अपना आदेश
अदालत ने 2018 में कथित हमला और शस्त्र अधिनियम मामले में बलात्कार पीड़िता के पिता को फंसाने के मामले में आरोप तय करने के विषय पर 13 अगस्त के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. सीबीआई के आरोप पत्र में कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई अतुल सिंह सेंगर और उत्तर प्रदेश पुलिस के तीन अधिकारियों समेत 10 लोगों के नाम आरोपियों के रूप में दर्ज हैं. शनिवार की सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता की हत्या का मामला भी अदालत के समक्ष आया. सीबीआई ने इस मामले में सेंगर और उसके भाई के नाम आरोपियों के रूप में शामिल नहीं किए हैं. सीबीआई ने कहा कि हत्या मामले में आरोपपत्र दायर किया जा चुका है और जांच जारी है.

पीड़िता के वकील ने लगाया आरोप, जांच अधिकारी ने नहीं की समुचित ढंग से जांच:-भारतेन्दु ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता है कि जांच अधिकारी ने जानबूझकर मामले में आरोपी के रूप में विधायक और उनके भाई अतुल सिंह सेंगर का नाम नहीं लिया और आरोपियों का समर्थन किया. पूरी निष्पक्षता के साथ साक्ष्य एकत्र किए गए थे. उनकी ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था. लोक अभियोजक ने कहा, अब तक, सीबीआई को विधायक के खिलाफ एक आरोपी के रूप में कुछ भी नहीं मिला है. यदि सुनवाई के दौरान एजेंसी को इन दोनों के खिलाफ कोई सबूत मिलता है तो एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा. बलात्कार पीड़िता और उसके परिवार के वकीलों धर्मेन्द्र मिश्रा और पूनम कौशिक ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने मामले की जांच समुचित ढंग से नहीं की.

आरोप है कि पीड़िता के पिता पर किया गया था हमला:-धर्मेन्द्र मिश्रा ने कहा, पिता को कथित तौर पर बुरी तरह से पीटा गया और इस कारण वह घायल हो गये और न्यायिक हिरासत में उनकी मौत हो गई. जांच अधिकारी ने जानबूझकर दो अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए जिसमें से एक आरोप पत्र में हमला और झूठे आरोप तय करने का मामला था और एक अन्य में हत्या का मामला था. उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक और उसके भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर 19 वर्षीय पीड़िता के पिता पर हमला किया गया था और उसके खिलाफ एक झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

न्यायिक हिरासत में हो गई थी गैंगरेप पीड़िता के पिता की मौत:-सुनवाई के दौरान न्यायालय को जांच अधिकारी ने बताया कि बलात्कार पीड़िता की मां और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए ठहरने की समुचित व्यवस्था की गई थी. मामले में केन्द्रीय एजेंसी ने जिन तीन पुलिस अधिकारियों के नाम आरोपियों के रूप में लिए हैं उनमें माखी के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, उप निरीक्षक कामता प्रसाद और कॉन्स्टेबल आमिर खान शामिल हैं. वे अभी जमानत पर हैं. अन्य आरोपियों में शैलेन्द्र सिंह, विनीत मिश्रा, वीरेंद्र सिंह, शशि प्रताप सिंह और राम शरण सिंह शामिल हैं. बलात्कार पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी.

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