यहां तो महिलाएं घूंघट में लड़ती हैं कुश्ती, एक दूसरे को अखाड़े पर उठा-उठाकर हैं पटकती

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वीरभूमि बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले के लोदीपुर निवादा गांव में सैकड़ों साल पुरानी परम्परा को महिलाएं आज भी पूरी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निभा रही हैं। गांव में सिर्फ महिलाओं का दंगल होता है जिसमें पुरुषों के शामिल होने पर पूरी तरह प्रतिबन्ध रहता है। इस अजब-गजब के दंगल में घूंघट वाली महिलाएं दांवपेंच दिखाती हैं। बुजुर्ग महिलाएं भी अखाड़े में पूरे उत्साह के साथ कुश्ती लड़ती हुई एक दूसरे को अखाड़े में उठा-उठाकर पटकती है। रक्षाबंधन पर्व के अगले दिन सैकड़ों बरस पुरानी प्रथा को आगे बढ़ाते हुये महिलाओं का अनोखा दंगल होगा जिसके लिये तैयारियां अब शुरू कर दी गयी हैं।

ब्रिटिश हुकूमत में फौजों से दो हाथ करने को महिलाओं ने शुरू किया था दंगल

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अंग्रेजी फौजों ने यहां के लोगों पर जुल्म ढाये थे। उनके खिलाफ जब विद्रोह की आग भड़की थी तो महिलाओं ने भी कुश्ती में दांवपेंच सीखे थे। मुस्करा क्षेत्र के लोदीपुर निवादा एक ऐसा गांव है जहां सैकड़ों बरस पूर्व महिलाओं के दंगल की शुरुआत हुई थी। सैकड़ों साल पुरानी प्रथा को आगे बढ़ाते हुये महिलाओं ने दंगल करने की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। दंगल का शुभारंभ गांव की सरपंच करेंगी।
पूर्व ग्राम प्रधान ने बताया कि दंगल के आयोजन से पूर्व समूचे क्षेत्र में महिलाएं जवारे निकालकर मंगल गीत गाती हैं। फिर महिलाएं गांव की परिक्रमा करती हैं। दंगल के अखाड़े में महिलाएं मुगदर भांजती हुयी अपनी कला का प्रदर्शन करती हैं। दंगल में घूंघट वाली महिलाओं में भी कुश्ती भी करायी जाती है जिसे देखने के लिये आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में महिलाएं भी आती हैं।

अखाड़े में गांव की महिला ही ढोल बजाकर घूंघट वाली पहलवानों में भरती है जोश

दंगल के आयोजन की तैयारियां भी गांव की महिलाएं ही करती हैं। इसमें पुरुषों की कोई मदद नहीं ली जाती। दंगल में ढोल बजाने के लिये पुरुष को नहीं बुलाया जाता। महिलाएं ही कुश्ती के दौरान ढोल बजाने के साथ ही पुरुषों पर नजर भी रखती हैं। निवादा गांव निवासी समाजसेवी अखिलेश कुमार पाठक ने बताया कि यहां गांव में महिलाओं का दंगल हर साल रक्षाबंधन के अगले दिन होता है जो अपने आप में अनोखा है। इस बार दंगल गांव में पुरानी बाजार में होगा जिसके लिये तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं। दंगल में दांवपेंच दिखाने वाली महिलाओं की सूची भी तैयार हो रही है। उन्होंने बताया कि इस अनोखे दंगल का शुभारंभ दोपहर से होगा जिसका समापन शाम को होगा।

दंगल में सिर्फ महिलाओं की होती है एंट्री

ग्राम प्रधान गुड्डों कुशवाहा ने बताया कि महिलाओं के दंगल में सिर्फ गांव और आसपास के इलाकों की महिलाओं की ही एंट्री करायी जाती है। महिलाओं की कुश्ती के दौरान कोई पुरुष न घुस आये इसके लिये महिलाओं की एक टुकड़ी अखाड़े के चारों और मुस्तैद की जाती है। यदि कोई पुरुष महिलाओं का दंगल घुसने का प्रयास भी करता है तो लाठी-डंडे से लैस महिलाएं उसके लिये दीवार बन जाती हैं।

दंगल में कई महिलाएं कुश्ती में पड़ती हैं भारी

मुस्करा क्षेत्र के लोदीपुर निवादा गांव में इस साल दंगल में मनु, फूलारानी, गुलाब रानी, सुपुर्तिन कुसुमा, कौशिल्यां, ज्ञानवती, संपत, मानबाई, सियारानी में कुश्ती धूम मचाएंगी। पिछली बार ममता, कुसुमकली व सुशीला, दुलारी में कुश्तियां बराबर पर छूटी थी। संपत को अखाड़े में दांवपेंच दिखाती हुई सियारानी ने धूल चटायी थी। इसी तरह कई अजब-गजब की कुश्तियां भी चर्चा में रही थी।

अंग्रेजों के समय से जारी है महिलाओं का दंगल

लोदीपुर निवादा गांव के बुजुर्ग रिटायर्ड शिक्षक जगदीश चंद जोशी का कहना है कि महिलाओं का अनोखा दंगल ब्रिटिश हुकूमत के समय से चल रहा है। उन्होंने बताया कि उस जमाने में अंग्रेज सैनिकों के अत्याचार का सामना करने के लिये गांव की चोरी-छिपे महिलाओं ने अखाड़े में दांवपेंच सीखे थे। तभी से परम्परा कायम हो गयी है। पिछले कई दशक से महिलाएं एकजुट होकर अखाड़े में आपस में भिड़ती हैं।

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