असम और बिहार में बाढ़ से 74 लाख लोग प्रभावित, अब तक 50 की मौत

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पिछले कई दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण देश के अधिकतर हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है। असम, बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में बाढ़ से 74 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे खराब हालात असम के हैं, जहां के 33 में से 30 जिले प्रभावित हुए हैं। प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नद और उसकी सहायक नदियां कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

असम में 15 लोगों की मौत

असम के 33 में से 30 जिलों में बाढ़ से करीब 42.86 लाख लोग प्रभावित हैं। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को फोन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से बात कर बाढ़ की ताजा स्थिति की जानकारी ली। साथ ही हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया है। एनडीआरएफ ने असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 11 से 15 जुलाई तक चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान के दौरान 2500 से अधिक लोगों को बचाया। असम में बाढ़ से निपटने के लिए एनडीआरएफ की 15 टीमें तैनात हैं।
राज्य सरकार के मुताबिक 113 राजस्व सर्किल के 4,157 गांवों बाढ़ के पानी में घिरे कुल 1,50,213.60 हेक्टेयर में खड़ी फसल डूब गई है। अब तक 15 लोगों की बाढ़ व भूस्खलन से मौत हुई है। बाढ़ के कारण 12,44,135 बड़े, 6,29,205 छोटे पालतु पशु तथा 15,43,026 पोल्ट्री भी प्रभावित हुए हैं। सोमवार को तीन बड़े पशु बह गये। जबकि बाढ़ से सोमवार को 171 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए।

बिहार में अब तक 24 की मौत

बिहार में बाढ़ से 10 जिले प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, पश्चिम चंपारण, कटिहार, सहरसा, मधुबनी, सुपौल और दरभंगा शामिल हैं। इन जिलों के करीब 20 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। उफनायी नदियों का पानी कोसी और सीमांचल के जिलों के गांव व शहरों में घुसकर कहर ढा रहा है। अररिया जिले में अब तक नौ और मोतिहारी में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीतामढ़ी, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मघुबनी, दरभंगा का हवाई सर्वे किया है।

उप्र में अब तक 11 लोगों की मौत, वाराणसी शहर में दो हजार लोग प्रभावित

उत्तर प्रदेश में बाढ़ से 20 से अधिक जिले प्रभावित हैं। अब तक 11 लोगों की मौत हो गयी है। करीब 12 लाख लोग प्रभावित हैं। प्रदेश में प्रमुख नदियों- गंगा, यमुना व घाघरा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। सोमवार को वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने की वजह से दो हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। देवरिया और गोरखपुर में राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बरसाती नाले में उफान से देवरिया में बाढ़ जैसी स्थिति है।

खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर बह रही शारदा

लखीमपुर-खीरी में जहां शारदा खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर बह रही है। कुशीनगर में बड़ी गडंक के ऊफान को देखकर अधिकारी सतर्क हो गए हैं। बलरामपुर, कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, संत रविदास नगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर आदि जिलों के उच्चाधिकारियों की नजर नेपाल से बाल्मिकी नगर बैराज से छोड़े जाने वाले पानी पर है, क्याेंकि पिछले साल तीन लाख क्यूसेक से ऊपर पानी छोड़े जाने के बाद, गोरखपुर शहर में पानी घुस गया था। कुशीनगर, महराजगंज आदि जिले तो तबाह हो गये थे। इस वर्ष शनिवार को बड़ी गंडक में सुबह 1,66,863 क्यूसेक जल छोड़ा गया था। लखीमपुर में शारदा कई गांवों में तबाही मचा रही है। नौगवां क्षेत्र में शारदा की कटान से क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ गयी है।
प्रदेश की बाढ़ नियंत्रण एवं कृषि विपणन मंत्री स्वाती सिंह ने सोमवार को शारदा नगर, लखीमपुर के बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

उत्तराखंड में एनएच-58 पर भूस्खलन

उत्तराखंड में बारिश के कारण लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। सोमवार को एनएच-58 पर भूस्खलन हो गया। चमोली के करीब लंगासु में हुए भूस्खलन के बाद एनएच-58 को बंद कर दिया गया है।

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