नैनी को शहर से जोड़ने वाला यमुना पुल 154 साल का सफर होने जा रहा पूरा,जाने कब होगा पूरा

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प्रयागराज/इलाहाबाद:-दिल्ली-हावड़ा रूट के महत्वपूर्ण पुलों में से एक नैनी यमुना पुल 15 अगस्त को 154 साल का हो जाएगा। इंजीनियरिंग के बेजोड़ नमूने को देखने के लिए लोग बाहर से आते हैं। उत्तर मध्य रेलवे इस पुल की मरम्मत पर लगातार ध्यान दे रहा है। इसके लिए अलग से बजट भी मिला है।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले 1855 में नैनी और इलाहाबाद के बीच इस पुल को बनाने की कवायद शुरू की गई। चार साल बाद 1859 में पुल बनाने का कार्य शुरू हो पाया। छह साल की कठिन मेहनत के बाद इंजीनियर रेंडल की डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा सका। ब्रिटिश इंजीनियर सिवले की देखरेख में पुल बनकर तैयार हुआ। 15 अगस्त 1865 में पहली बार नैनी यमुना पुल हावड़ा-दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेन दौड़ी। दो मंजिला लोहे के इस पुल के ऊपर से रेल संचालन और निचले हिस्से से सड़क यातायात का संचालन होता है।

14 पिलर पर बना पुल 
इंजीनियरिंग  का बेजोड़ नमूना
इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना यमुना पुल 14 पिलर पर खड़ा है। पिलर की डिजाइन हाथी पांव जैसा है। इस पुल की लंबाई 3150 फीट है। इसमें कुल 17 स्पैन हैं। जिसमें 14 स्पैन 61 मीटर, एक स्पैन 12.20 मीटर के हैं। एक स्पैन 9.18 मीटर का है। पुल के प्रत्येक  पिलर की लंबाई 67 फीट एवं चौड़ाई 17 फीट है। इस पुल को बनाते समय काफी मुश्किलें भी आईं। पुल के अन्य पिलर 1862 तक बन गए थे, लेकिन यमुना के तेज बहाव के चलते पिलर नंबर 13 को बनाने में अत्यंत परेशानी का सामना करना पड़ा था।

पिलर के नींव की गहराई 42 फीट 
44,46,300 लाख की लागत से हुआ था तैयार इस पुल में लगभग 30 लाख क्यूबिक ईंट व गारे का प्रयोग किया गया है। पिलर के नींव की गहराई 42 फीट तक है। निम्न जलस्तर से गर्डर के नीचे की ऊंचाई लगभग 58.75 फीट तक है। इसमें लगाए गए गर्डर का वजन लगभग 4300 टन है। उस समय इस पुल के निर्माण की लागत 44,46,300 रुपये आई थी। इसमें गर्डरों की लागत 1,46,300 आई थी। 1913 में इसे डबल लाइन में परिवर्तित किया गया। 1928-29 में पुराने गर्डरों के स्थान पर नए गर्डर लगाए गए। 2007 में लकड़ी के स्लीपर के स्थान पर स्टील चैनल स्लीपरों को लगाया गया।

1978 की बाढ़ में भी ट्रेनों का आवागमन था चालू
प्रयागराज में 1978 में अब तक की सबसे भीषण बाढ़ आई थी। शहर का अधिकांश हिस्सा जलमग्न होने के बाद पुल पर निर्बाध रूप से ट्रेनों और गाडिय़ों का आवागमन चालू था। पुल को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ था। इलाहाबाद मंडल के जनसंपर्क अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि बजट में यमुना ब्रिज को संवारने के लिए पैसा दिया गया है। अब पुल और सुंदर हो जाएगा।

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