जम्मू-कश्मीर में 6 महीने बढ़ा राष्ट्रपति शासन,संसद की मंजूरी

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संसद ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिये बढ़ाये जाने के प्रस्ताव और राज्य में सीमा के नज़दीक रहने वाले लोगों को नियंत्रण रेखा के नज़दीक रहने वालों की ही तरह आरक्षण देने सम्बंधित विधयेक पर अपनी मोहर लगा दी।

भारत को तोड़ने वालों के देंगे उसी की भाषा में जवाब

राज्यसभा में सोमवार को इस सम्बंद्ध में प्रस्ताव और विधयेक पर विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। अमित शाह ने राज्यसभा में चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि जो भारत को तोड़ने की बात करेगा, उसको उसी भाषा में जवाब मिलेगा और जो भारत के साथ रहना चाहते है, उसके कल्याण के लिए हम चिंता करेंगे। जम्मू कश्मीर के किसी भी लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।

जल्द कश्मीरी पंडि़त दिखाई देंगे भवानी मंदिर में पूजा

अमित शाह ने कहा कि कश्मीर की आवाम की संस्कृति का संरक्षण हम ही करेंगे। एक समय आएगा जब माता क्षीर भवानी मंदिर में कश्मीर पंडित भी पूजा करते दिखाई देंगे और सूफी संत भी वहां होंगे। शाह ने कहा कि जम्हूरियत सिर्फ परिवार वालों के लिए ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। जम्हूरियत गांव तक जानी चाहिए, 40 हज़ार पंच, सरपंच तक जानी चाहिए और ये ले जाने का काम हमने किया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में 70 साल से करीब 40 हजार लोग घर में बैठे थे, जो पंच-सरपंच चुने जाने का रास्ता देख रहे थे। क्यों अब तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं कराए गए और फिर जम्हूरियत की बात करते हैं। मोदी सरकार ने जम्हूरियत को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम किया है।

अलगाववाद और आतंकवाद पर लगाया प्रतिबंध

शाह ने कहा कि हमने अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर प्रतिबंध रखने का काम किया। जेकेएलएफ पर इतने समय तक प्रतिबंध नहीं लगता था, हमने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का काम किया। जमायते इस्लामी, इसको भी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, उस पर भी हमने प्रतिबंध लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आवाजाही बंद कर दी जाती है। ये पहली बार नहीं हो रहा है।जब सीआरपीएफ के काफिले जाते हैं तो रोड का आवागमन बंद किया जाता है। 40 जवान मारे जाएं और हम हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएं, ये नहीं हो सकता। सुरक्षा के लिए आवागमन रोकना पड़े तो रुकेगा।

विपक्ष को शाह ने दिया करारा जवाब

चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता ने सरकार पर प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में शाह ने कहा कि मनोज झा और गुलाम नबी आजाद ने बड़ी आपत्ति जाहिर की कि हम नेहरूजी के बारे में देश की जनता में कुछ गलत विचार खड़ा करना चाहते हैं। ये ठीक सोच नहीं है। हम नेहरूजी के बारे में कोई गलत विचार खड़ा करना नहीं चाहते है और न जनता को गुमराह करना चाहते हैं। परन्तु एक बात है कि इतिहास की भूलों से जो देश नहीं सीखते, उनका भविष्य अच्छा नहीं होता है। इतिहस की भूलों की चर्चा होनी चाहिए, और इतिहास की भूलों से सीखना चाहिए।

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