Kathua Case में न्याय दिलाने में रही इनकी अहम भूमिका, फैसला आया ट्विटर पर दिया ऐसा रिएक्शन

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जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) के कठुआ (Kathua) में आठ वर्षीय एक बच्ची से बलात्कार और फिर उसकी हत्या (Kathua Rape Murder Case) के मामले में पठानकोट के एक विशेष अदालत ने सोमवार को छह लोगों को दोषी करार दिया. मुख्य आरोपी सांझीराम के बेटे एवं सातवें आरोपी विशाल को बरी कर दिया गया है. पीड़िता के परिवार के वकील फारुकी खान ने कहा, ‘‘अदालत ने छह लोगों को दोषी करार दिया है.

एक आरोपी, सांझीराम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया है.” कठुआ गैंगरेप मामले में एक नाम ऐसा है जिन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई. वो हैं वकील दीपिका सिंह राजावत. वो कठुआ गैंगरेप मामले में पीड़िता की वकील थीं, हालांकि पिछले साल पीड़िता के परिवार ने उनसे केस वापस से लिया था. उन्होंने ट्वीट कर लिखा- ‘आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दे दिया है.’ फैसला आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की.

 

मिल रही थीं जान से मारने की धमकियां
वकील दीपिका सिंह राजावत ने बताया था कि जब से वह मामले से जुड़ीं तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली. मामले में अगुवाई करने की घोषणा के बाद राजावत ने अखबारों की सुर्खियां बटोरी थीं. इसी बीच उनकी एक फोटो वायरल हुई थी. उनकी इस फोटो को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया गया था.

जम्‍मू बार एसोस‍िएशन ने दीपिका पर केस छोड़ने का काफी दबाव बनाया था. इसके बावजूद वो डटी रहीं. उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई से पहले मीडिया के सामने कहा भी था, ‘मेरा बलात्‍कार भी हो सकता है. मेरा कत्‍ल भी किया जा सकता है और शायद वे मुझे कोर्ट में प्रैक्टिस ही न करने दें. उन्‍होंने मुझे अलग-थलग कर दिया है. मुझे नहीं पता मैं कैसे रह पाऊंगी.’ धमकियों और बायकॉट के बावजूद दीपिका न्‍याय के लिए लड़ीं.

पिछले साल कठुआ में दुष्कर्म के बाद मौत के घाट उतार दी गई आठ साल की बच्ची के परिवार ने अपनी वकील दीपिका राजावत को हटाने का फैसला किया. उनके बाद वकील फारुकी खान ने ये केस लिया और आगे की लड़ाई लड़कर पीड़िता को न्याय दिलाया.

पंद्रह पन्नों के आरोपपत्र के अनुसार पिछले साल 10 जनवरी को अगवा की गयी आठ साल की बच्ची को कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया. उसे चार दिन तक बेहोश रखा गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गयी.

कठुआ रेप-मर्डर केस में आया फैसला, 6 दोषियों में से तीन को उम्रकैद

पिछले साल की शुरुआत में पूरे देश को झकझोर देने वाली जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुई रेप और मर्डर की घटना पर आज फैसला सुनाया गया. 8 साल की बच्ची के साथ रेप करने वाले कुल सात में से 6 आरोपियों को दोषी करार दिया है. इनमें से तीन को उम्रकैद और अन्य तीन को 5-5 साल की सजा सुनाई गई है. जिन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, उनमें सांझी राम, दीपक खजुरिया और परवेश शामिल हैं. जबकि तिलक राज, आनंद दत्ता और सुरेंद्र कुमार को 5-5 साल कैद की सजा सुनाई गई है.  इससे पहले पठानकोट की अदालत ने मुख्य आरोपी सांजी राम समेत अन्य 6 आरोपियों को दोषी करार दिया. सातवें आरोपी विशाल को बरी कर दिया गया है. इन सभी आरोपियों की सजा का ऐलान कर दिया गया है.

इन 6 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है:

1. ग्राम प्रधान सांजी राम (मुख्य आरोपी)

2. स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया,

3. रसाना गांव परवेश दोषी,

4. असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर तिलक राज,

5. असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता,

6. पुलिस ऑफिसर सुरेंद्र कुमार

जबकि सांजी राम का बेटे विशाल को बरी कर दिया है. कठुआ मामला जब सामने आया था तो देश ही नहीं दुनिया में इसने सुर्खियां बटोरी थीं. आम आदमी से लेकर बॉलीवुड के सेलेब्रिटी भी इंसाफ की गुहार लगा रहे थे.

इस मामले में पुलिस ने कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक को नाबालिग बताया गया. हालांकि, मेडिकल परीक्षण से यह भी सामने आया कि नाबालिग आरोपी 19 साल का है. पूरी वारदात के मुख्य आरोपी ने खुद ही सरेंडर कर दिया था.

बता दें कि शुरुआत में इस मसले को जम्मू कोर्ट में सुना गया लेकिन बाद में पठानकोट कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई जहां पर आज इसका फैसला सुनाया गया.

इस फैसले को देखते हुए पठानकोट कोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. यहां पर एक हज़ार से अधिक पुलिसकर्मियों को मुस्तैद किया गया, साथ ही बम निरोधक दस्ता, दंगा नियंत्रक दस्ता भी यहां पर तैनात रहे.

जिन 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था उनमें स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया, पुलिस ऑफिसर सुरेंद्र कुमार, रसाना गांव का परवेश कुमार, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज, पूर्व राजस्व अधिकारी का बेटा विशाल और उसका चचेरा भाई (जिसे नाबालिग बताया गया) शामिल था. इसके अलावा मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान सांजी राम भी पुलिस की गिरफ्त में है.

जम्मू से शिफ्ट किया गया था केस

कठुआ गैंगरेप मामले में SC के पास इसका ट्रायल चंडीगढ़ शिफ्ट करने और मामले को CBI को देने संबंधी याचिकाएं मिली थीं. पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केस को जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लेते हुए मामले की सुनवाई पंजाब में पठानकोट कोर्ट को ट्रांसफर किया था. SC ने इस मामले की CBI जांच की मांग को खारिज कर दिया था.

हैवानियत को पार करने वाली थी घटना

कठुआ रेप की घटना 10 जनवरी, 2018 को हुई थी. परिवार के मुताबिक, बच्ची 10 जनवरी को दोपहर में घर से घोड़ों को चराने के लिए निकली थी और उसके बाद वो घर वापस नहीं लौटी थी. करीब एक हफ्ते बाद 17 जनवरी को जंगल में उस बच्ची की लाश मिली थी.

मेडिकल रिपोर्ट में पता चला था कि बच्ची के साथ कई बार कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार हुआ है और पत्थरों से मारकर उसकी हत्या की गई है. उसके बाद बच्ची के साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या पर देशभर में काफी बवाल मचा था.

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