गिरिराज सिंह ने एक ट्वीट करके अपनी फजीहत करा ली, ‘अपनों’ ने भी लताड़ डाला

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पटना:-एक कहावत है ‘चौबे गए छब्बे बनने, दुबे बनकर लौट आए’… कुछ ऐसा ही वाकया केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के साथ मंगलवार को हुआ गिरिराज ने अखबारों और सोशल मीडिया पर पटना में विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा आयोजित इफ़्तार के फ़ोटो देखकर नसीहत क्या दे डाली, विपक्ष तो पीछे रह गया उनकी अपनी पार्टी के नेताओं और सहयोगी जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने उनकी आलोचना में कोई कसर नहीं छोड़ी. अब तो गिरिराज के समर्थक भी मानते हैं कि उनके राजनीतिक जीवन में चंद घंटों में उन्हें कभी इतनी राजनीतिक फजीहत नहीं झेलनी पड़ी.

गिरिराज सिंह ने एक ट्वीट किया था जिस पर विवाद हो गया.

इस ट्वीट पर गिरिराज के लिए सबसे करारा तमाचा वह खबर रही होगी जो सभी चैनलों पर आने लगी कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ट्वीट के मुद्दे पर उनसे बातचीत की है और उनकी क्लास लगाई है. भविष्य में ऐसे ट्वीट न करने की नसीहत भी दी है. इस खबर के आने से पहले उप मुख्यमंत्री और बिहार BJP के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने गिरिराज के इस बयान की निंदा की. मोदी ने गिरिराज को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन में कहा कि चाहे राम नवमी की पूजा हो या नवरात्र, होली मिलन हो या इफ़्तार, नीतीश कुमार न केवल सब में भाग लेते हैं बल्कि अगर बात आयोजन करने की हो तो भी पीछे नहीं हटते.

बिहार BJP के कुछ नेताओं का कहना है कि जब नीतीश कुमार और BJP एक-दूसरे के विरोधी होते थे तब भी नितिन, नवीन, संजीव चौरसिया और संजय मयूख के दुर्गा पूजा समारोह या रामनवमी के जुलूस का स्वागत करने में नीतीश कभी भी पीछे नहीं हटते थे. बिहार में नीतीश मंत्रिमंडल में कुछ मंत्रियों का तो यह भी करना है कि जब नीतीश मंत्रिमंडल में गिरिराज सिंह मंत्री होते थे तब मुख्यमंत्री आवास में आयोजित होने वाली इफ़्तार में उनकी मौजूदगी भी होती थी.

गिरिराज सिंह को जब जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता संजय सिंह ने मानसिक इलाज कराने की सलाह दी तो शायद उन्हें लगा होगा कि बिना बात के उन्होंने अपने एक ट्वीट से अपनी फ़ज़ीहत ख़ुद करा ली. हालांकि नीतीश कुमार ने एक वाक्य में पूरे घटनाक्रम को कारिज कर दिया कि यह सब कुछ मीडिया में सुर्खियों में बने रहने के लिए गिरिराज सिंह करते हैं. हालांकि गिरिराज समर्थकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर उनके इस ट्वीट पर उन्हें काफ़ी ज़्यादा रीट्वीट और लाइक मिल रहे हैं. लेकिन वे यह भी मानते हैं कि अनायास यह ट्वीट कर गिरिराज सिंह ने बिहार की राजनीति में अपनी गंभीरता खुद कम की है.

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