विडियो:काशी नगरी में नामंकन रद्द होने के विरोध में धरने पर बैठा संत समाज,पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप

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वाराणसी:काशी नगरी में नामंकन रद्द होने के विरोध में धरने पर बैठा संत समाज,पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप,वाराणसी इन दिनों जंग का मैदान बना हुआ है. एक तरफ जहां तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) के नामांकन की वैधता को लेकर गहमा गहमी चल ही रही है, वहीं दूसरी तरफ जिला कलेक्ट्रेट में श्री विद्या मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने साधू संतों के साथ पहुंचे और जिला निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए. धरने पर बैठने की वजह उनके प्रत्याशी का नामंकन रद्द करना रहा. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में संत समाज ने उनके खिलाफ चुनावी ताल ठोकी थी.

पीएम मोदी के खिलाफ अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल किया था, पर आज उनका नामांकन तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया. ये सूचना जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पास पहुंची तो वो नाराज हो गए और फौरन जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर न सिर्फ विरोध दर्ज कराया, बल्कि धरने पर भी बैठ गए.

अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के प्रत्याशी वेदांताचार्य श्रीभगवान बीएचयू से आचार्य की डिग्री ली है और वो चार बार गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं. वो अपने नामांकन के खारिज होने को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गुस्से में कहते हैं कि जिन बातों को लेकर पर्चा खारिज़ किया जा रहा है वो कोई गलती है ही नहीं. सिर्फ पर्चा खारिज करना है इसलिए यह कमी निकाली गई है. इस बात को लेकर वह धरने पर बैठे हैं और कह रहे हैं कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी वह धरने से नहीं उठेंगे.

उधर, BSF के बर्खास्त जवान तेज बहादुर के नामांकन को लेकर एक नया मामला सामने आया है. दरअसल, चुनाव आयोग ने तेज बहादुर को एक नोटिस भेजा है जिसमें उनके दो हलफनामों में दिए गए अगल-अलग तथ्यों के संदर्भ में जानकारी मांगी गई है. एक हलफनामा तेज बहादुर ने निर्दलीय के रूप में भरा था, जबकि दूसरा उसने सपा उम्मीदवार के रूप में दाखिल किया है.

बता दें कि तेज बहादुर (Tej Bahadur Yadav) पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Natrendra Modi) के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश की थी, उसमें उन्होंने अपने हलफनामे में सेना से बर्खास्तगी की बात कही थी, लेकिन समाजवादी पार्टी की तरफ से जब उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया तो शायद इस तथ्य को छुपा लिया. नामांकन पत्र जांच के दौरान वाराणसी के रिटर्निंग अफसर को जब इस तथ्य की जानकारी मिली तो उन्होंने नोटिस भेजकर उनसे इसका जवाब मांगा है.

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