पहली बार 51 मुस्लिम छात्रों ने UPSC में किया पास, बने IAS

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सिविल सेवा परीक्षा 2017 के फाइनल रिजल्ट आ गये हैं. इस परीक्षा में कुल 990 लोगों को सफलता मिली है, जिसमें 51 (5.15 फीसदी) मुस्लिम हैं. आजाद भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब इतनी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग आइएएस की परीक्षा में पास हुए हैं.

टॉप 100 में 6 मुस्लिम हैं, जिसमें तीन महिलाएं हैं. इनके नाम समीरा एस (28वीं रैंक) जमील फातिमा जेबा (62वीं रैंक) और हसीन जेहरा रिजवी (87वी रैंक) हैं. वर्ष 2016 में शीर्ष 100 उम्मीदवारों में 10 और 2015 में मात्र एक मुस्लिम उम्मीदवार जगह बना पाया था.

शुक्रवार की शाम UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जारी रिजल्ट में हैदराबाद के अनुदीप डुरीशेट्टी ने ऑल इंडिया लेवल पर टॉप किया. उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले साद मियां खान ने 25वीं रैंक हासिल की, जो कि मुस्लिम उम्मीदवारों में सबसे ऊंची रैंकिंग है.

मेरिट लिस्ट में कुल 990 लोग हैं, जिसमें 476 कैंडिडेट जनरल केटेगरी के हैं, 275 ओबीसी, 165 एससी और 74 एसटी श्रेणी के हैं. ज्ञात हो कि वर्ष 2016 में 50, 2015 में 37, 2014 में 40 और 2013 में 34 मुस्लिम अभ्यर्थियों ने सिविल सेवा की परीक्षा पास की.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि वर्ष 2011 में हुई जनगणना के अनुसार, मुसलमानों की कुल आबादी 14.23% है, लेकिन वे शिक्षा और संसाधनों की कमी के कारण अक्सर शीर्ष सरकारी सेवाओं में बहुत कम प्रतिनिधित्व करते हैं.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का प्रतिशत 8.57 है. 2006 में भारतीय मुसलमानों के हालात पर आयी जस्टिस सच्चर समिति की रिपोर्ट में बताया गया था कि सिविल सेवा में मुसलमान सिर्फ तीन प्रतिशत हैं, जबकि पुलिस सेवा में यह संख्या चार प्रतिशत है.

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