EVM हैक करके दिखाओ? अली इशरत

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इलाहाबाद:उ प्र में भाजपा की जबरजस्त जीत ने अपने दम परर सरकार तो बना ही की है . कई मुल्कों से भी अधिक आबादी वाले अपने प्रदेश में भाजपा की जीत ने यह साबित कर दिया कि मोदीजी की मजबूती और उनका “ सबका साथ – सबका विकास ( मुसलामानों के अतिरिक्त) “ और मुस्लिम विरोधी स्वर का जलवा आगे भी काएम रहेगा . चुनाव में भाजपा की ज़बर्जस्त जीत के बाद तो हालात ऐसे हो गए कि जैसे गोरी ने अपने मुख पर केश डाल लिए हैं . विपक्ष तो अपनी अपनी कोठी में चले गए जैसेकि अपना ही अंतिम संस्कार करके लौटे हों . विपक्ष का तो रो रो कर बुरा हाल हो गया है . कुछ ने तो अपना सबकुछ बर्बाद कर आईने के सामने अपना सर फोड़ डाला और कितनों के तो अरमां आंसूओं में बह गए . अब इन्हें कौन समझाए कि अरमां तो आंसूओं में ही बहेंगे , आंसू गंगा में नहीं बहाए जाते . EVM गालियाँ खा रही हैं और सत्ता दुहतथड ( DUHATTHAD ) मार मार कर हंस रहा है . EVM मनचाहे नतीजे निकाल सकती या नहीं या फिर हारे हुए राजनीतिक दलों की सिर्फ कुंठा ? वास्तविकता तो यह है कि अपनी पसंद की वोटिंग EVM से तो स्पष्ट होती नहीं , VVPAT अर्थात वोटिंग का प्रिंट आऊट निकालने जैसी तक्नीकी के बारे में अदालत ने कहा ज़रूर है लेकिन यह सुलभ हो नहीं पाई . शायद जानबूझ कर या फिर मजबूरी ? कुल जमा EVM की प्रक्रिया पर भरोसे की कमी के आरोप-दरआरोप भी लगे . अपने देश में इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है उधर दुनिया के अधिकाँश हिस्सों में EVM को वर्जित करार दिया गया है .
उ प्र में भाजपा की अप्रत्याशित जीत ने सबको चौंका दिया है . ऐसा नहीं है कि इस जीत का सुख भोगने वाली भाजपा पहली पहली पार्टी है . पूर्व में बहुजन समाज पार्टी , समाजवादी पार्टी , आम आदमी पार्टी , बिहार में नितीश और लालू के गठबंधन वाली पार्टी ने भी विधान सभाए चुनाव में अप्रत्याशित जीत ही दर्ज की थी . अभी लेटेस्ट पंजाब में कांग्रेस ने भी अप्रत्याशित जीत दर्ज की है . जहां तक EVM में गड़बड़ी कर मन माफिक रिज़ल्ट पाने की बात है तो उन अप्रत्याशित जीत पर भी आरोप लगना और लगाना चाहिए . यह तो वही मिसाल हूई कि मीठा मीठा गप और कडवा कडवा थू . EVM मशीन का प्रयोग अपने देश में 1999 के चुनावों से आरम्भ हुआ है . इससे वोटों की गिनती न केवल आसानी से होती है बल्कि समय भी बहुत कम लगता है . लेकिन समय समय पर इसकी कारगुजारी और विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं . सत्ता में आने से बहुत पहले भाजपा नेताओं ने भी इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाये थे . 2009 के लोक सभा चुनाव परिणाम के बाद भाजपा ने EVM के खिलाफ एक प्रकार का अभियान चलाया था . किरीट सोमय्या ने कई शहरों में इसका प्रदर्शन भी किया था . इनके साथ एक विशेषज्ञ कम्प्युटर लैपटाप पर दिखाता था कि EVM में कैसे गड़बड़ी की जा सकती है . भाजपा प्रव्क्ता जीवीएल नरसिम्हाराव ने EVM पर “ डेमोक्रेसी ऐट रिस्क , कैन वी ट्रस्ट ओवर EVM “ शीर्षक से एक किताब लिखी जिसकी भूमिका एल के अडवानी ने लिखी थी . इस किताब में EVM में की जाने वाली गड़बड़ियों का ज़िक्र है . EVM की विश्वसनीयता के सिलसिले में दिल्ली उच्च न्यायालय तथा सर्र्वोच्च न्यायालय में विभिन्न राजनीतिक दलों की मांग स्वीकार करते हुए आदेश दिया था कि प्रत्येक EVM के साथ एक प्रिंटर लगाया जाय ताकि वोटर अपने मत/ वोट के सही प्रयोग के बारे में आश्वस्त हो सके . VVPATM अर्थात वोटर वेरिफाइड VEIFAAID पेपरआडिट ट्राएल मशीन – कहे जाने वाले इस प्रबंधन को 2014 के चुनाव के समय एक प्रयोग के रूप में आठ संसदीय चुनाव क्षेत्र में लागू भी किया था ,
मीडया और सोशल मीडिया परर ख़बरें आने पर ईवीएम् में छेड़ छाड़ का शक होने लगा है दूसरा यह कि अमेरिका में मिशिगन यूनिवर्सिटी के कुछ शोधकर्ताओं ने भारतीय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को “ हैक “ करने का तरीका खोज निकाला है और यह दावा किया है कि इससे मतदान के परिणाम को प्रभावित किया जा सकता है . इन शोध कर्ताओं ने पहले एक EVM के साथ अपना बनाया उपकरण जोड़ दिया फिर एक मोबाइल फोन से EVM को सन्देश / मैसेज भेजकर मतदान के परिणाम में सेंध लगा दी . लेकिन भारतीय चुनाव आयोग के अधिकारीयों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ऐसा सम्भव नहीं है . एक भारतीय इंटरनेट विशेषज्ञ का कहना है कि इसमें गड़बड़ी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है क्योंकि हर EVM एक तरह का कम्प्युटर ही है . यहाँ पर यह भी समझ लेना चाहिए कि अमेरिका और जापान जैसे विकसित देश आजभी EVM के इस्तेमाल से कतराते हैं , नीदरलैंड ने पारदर्शिता के अभाव में इसे बैन किया हुआ है , आयरलैंड तो करोडो खर्च करने के बाद तीन साल के रिसर्च के बावजूद सुरक्षा और पारदर्शिता को देखते हुए EVM को प्रतिबंधित कर दिया है . जर्मनी की बात करें तो वहां इसे असंवैधानिक तक करार दे दिया है . इटली ने भी इसे खारिज कर दिया है . इंग्लैण्ड और फ्रांस ने तो इसका उपयोग तक नहीं किया है .
इन सब के अलावा सुब्रमुन्यम स्वामी (SURAMUNYAM SWAMI ) गुजरात विधान सभा चुनाव को लेकर EVM पर सवाल उठा चुके हैं उनका मानना था कि यदि EVM में छेड़ छाड़ न की गयी होती तो भाजपा वर्तमान की तुलना में 35 सीट अधिक जीतती . धोखा धडी के सम्बन्ध में बी एम् सी (मुम्बई) चुनाव में EVM पर एक निर्दलीय प्रत्याशी श्रीकांत शिरसत (प्रत्याशी) ने तब सवाल उठाया जब उसके अपने स्वं द्दारा दिए गए वोट का पता नहीं चला और उसका वोट वहां पर शून्य दिखाया गया . ऐसे हालात में मायावती की आपत्ति में बहुत दम प्रतीत होता है कि मुस्लिम प्र्रभावित वाले क्षेत्रों में भाजपा को कैसे अधिक वोट मिले . हालांकि अबतो पूरा का पूरा विपक्ष EVM की पारदर्शिता पर ऊँगली उठा रहा है . ऐसे में भारतीय चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि EVM में कोइ गड़बड़ी न की जा सके और इसके लिए जो भी क़दम उठाने आवश्यक हों उठाये जाएँ .
अमेरिका के कम्प्युटर विज्ञान के प्रोफ़ेसर एलेक्स हाल्डर मैन के अनुसार भारतीय मशीनों के हार्डवेयर आसानी से बदले जा सकते हैं . मशीन के जिस प्रोग्राम में वोटिंग डाटा स्टोर रहता है वे अनसेफ हैं और उन्हें बाहरी सोर्स से मैनिपुलेट किया जा सकता है . कंट्रोल यूनिट के डिस्प्ले सेक्शन में कुख्यात ट्रोज़न वायरस के साथ एक चिप लगा दी जाय तो EVM हैक करना आसान हो जाता है . यह चिप मन माफिक नतीजे उदघाटित कर सकती है . EVM को लेकर विरोध प्रतिरोध बढ़ता ही जा रहा है . एक तरफ विपक्ष दावा कर रहा है कि EVM में धांधली कर लोकतंत्र की हत्या की जा रही है दूसरी और चुनाव आयोग ने हैकिंग के मामले में खुली चुनौती दे दी है कि वे EVM के साथ (छेड़-छाड़) कर के दिखाए .चुनावी पराजय से हैरान परेशान राजनीतिक दल जिस तरह से EVM पर अपनी खीझ उतारने में लगे हुए हैं वह इसलिए भी शर्मनाक हो सकता है कि क्योंकि कुछ लोगों का मानना है कि निर्वाचन आयोग की मर्यादा से खिलवाड़ है , कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव निष्पक्ष ,स्वतंत्र , और भरोसेमंद बनाने के लिए भारतीय चुनाव आयोग की दुनिया भर में सराहना हो रही हो तब उसकी मंशा पर सवाल उठाना एक सम्मानित संवैधानिक संस्था के निरादर के अलावा और कुछ नहीं . लोकतंत्र को मज़बूत बनाने में चुनाव आयोग के योगदान की अनदेखी करना एक तरह से लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाला काम है . दुर्भाग्य से यही नहीं हो रहा है . कुछ राजनीतिक पार्टियों ने तो EVM के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और बैलेट पेपर के ज़रिये चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं . जबकि बैलेट पेपर से चुनाव कराना बहुत ही नीरस व् समय लेने वाला है , पर हाँ EVM में और सुधार करने एवं चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग उचित और जायज़ है . चुनाव आयोग ने EVM की पुख्ता सुरक्षा का दावा करते हुए कहा है कि मई के पहले हफ्ते में कोइ भी इन मशीनों को हैक करके दिखाए . चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार मई के पहले हफ्ते से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि , विशेषज्ञ , वैज्ञानिक और तकनीकीविद एक हफ्ता या दस दिन के लिए आकर मशीनों को हैक करने की कोशिश कर सकते हैं . यहाँ पर यह BHI भी अवगत कराना अति आवश्यक है कि सन 2009 में भी चुनाव आयोग ने EVM को हैक करने की चुनौती दी थी लेकिन कोइ इसे साबित नहीं कर सकता .
हालांकि EVM में छेड़ छाड़ के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गयी है , याचिका करता का आरोप है कि EVM के साथ छेड़ छाड़ हो रहा है . याचिका करता का दावा है कि EVM में छेड़ छड सम्बह्व है तथा EVM की जांच विशेषज्ञों से कराने की गुहार की गयी है . सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव योग से पूछा है कि आखिर अदालती आदेश के बावजूद EVM में पर्ची की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी . बहुजन समाज पार्टी द्दारा EVM की विश्वसनीयता को लेकर दायर एक याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है . कांग्रेस , समाजवादी पार्टी तथा त्रिमूल कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले में याचिका दाखिल की है . अदालत ने कहा है कि EVM के बारे में माना गया था कि यह बूथ लूटने सहित अन्य खामियों का समाधान है लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं तो अदालत इस पर विचार करेगी . बहुजन समाज पार्टी के वकील ने कहा कि चुनाव आयोग द्दारा कई बार याद दिलाने के बावजूद केंद्र सरकार ने VVPAT के लिए पर्याप्त फंड जारी नहीं किये .

इस समय ईवीएम् पर कुछ ज्यादा ही लोड आ गया है . हर ज़िम्मेदारी अब ईवीएम् पर . हारने वाले कहने लगे हैं कि हमतो जीते हुए थे सर्वे रिपोर्ट के अनुसार . अब ईवीएम् ने हरा दिया तो हम क्या कर सकते हैं ? एक तरह से ईवीएम् पर दोष मढने की होड़ लग गयी है . वैसे भी चुनाव में खाली झूठ नहीं चल पाता , झूठ स्मार्ट और स्मार्टर होना चाहिए . पब्लिक लाख सयानी हो स्मार्ट झूठ में तो फंस ही जाती है . ऐसा प्र्रतीत होता है कि विपक्षी दल तो खुद को एकजुट करने और जनादेश को नकारने के लिए ईवीएम् को जानबूझ कर बदनाम करने में लगे हुए हैं . पहले हर चुनावी हार के लिए एक अदद सिर की तलाश की जाती थी जिस पर ठीकरा फोड़ा जा सके . अब बिना किसी गवाह सबूत के इस नतीजे पर पहुँच सकते है कि आज कोइ भी हार होती है तो उसकी ज़िम्मेदारी केवल ईवीएम् ही होती है .

There is a lot of more load at EVM at this time. Now every responsibility is on EVM. The losers have started saying that we were winning live according to the survey report. Now EVM defeats, what can we do? In a way, there is a competition to blame EVMs. Anyway, there can be no falsehood in the election, the lie should be smart and smarter.
The public hohow many bawns are they are trapped in a smart lie. It is believed that the opposition parties are deliberately trying to defame themselves and denigrate the EVM to deny the mandate. For the first of every election defeat, a headless head was searched for which could be broken. Now, without any witness evidence, it can be concluded that if any loss is done today, then its responsibility is only EVM.

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