राजनीतिक नियुक्ति पर अंकुश के लिए छिड़ेगा रण

0
156

uppscइलाहाबाद:-भर्ती संस्थाओं में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति रद्द होने से उत्साहित प्रतियोगियों ने अब इनके चयन में पारदर्शिता के लिए भी मोर्चा खोल दिया है। ऐसी संस्थाओं में सियासी नियुक्ति न हो अब इसके लिए लड़ाई होगी। लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए प्रदेश सरकार ने जो प्रावधान तय किए हैं, उससे प्रतियोगी उससे सहमत नहीं हैं। प्रतियोगी सर्च कमेटी में न्यायपालिका की भागीदारी की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति रद्द कर दी है। उच्चतर और माध्यमिक में तो विवाद के बाद तैनात नए अध्यक्ष की नियुक्ति भी रद्द कर दी गई। गौर करने वाली बात यह है कि ये लोग पद की योग्यता ही धारण नहीं करते थे। ऐसे में साफ है कि राजनीतिक नफा-नुकसान तथा व्यक्तिगत संबंधों को ध्यान में रखकर इनकी नियुक्ति की गई थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए अभी तक कोई नियमावली नहीं थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने नियमावली बनाई है। खास यह कि इसमें सर्च कमेटी के गठन की बात कही गई है, जिसमें तीन वरिष्ठ अफसर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और प्रमुख सचिव कार्मिक शामिल होंगे। इनके सुझाव पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री की ही लगेगी। यानी, कुल मिलाकर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार सरकार के पास ही होगा। पूर्व के अनुभवों को देखते हुए प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से इसके विरोध की घोषणा की गई है। उनका कहना है कि इन संस्थाओं में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार हो। सर्च कमेटी में हाईकोर्ट के जज और लोकायुक्त को शामिल करने की भी वे मांग कर रहे हैं। प्रतियोगियों की इस मांग को कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों का भी समर्थन है। समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि चयन में पारदर्शी व्यवस्था अपनाने के लिए सडक़ पर आंदोलन के साथ कानूनी लड़ाई भी शुरू होगी। इसके लिए विधिक राय ली जा रही है।