अब शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर SC में याचिका,19 को सुनवाई

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दिल्ली/पटना:शहाबुद्दीन की वजह से अपने बेटों को गंवाने वाले चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. उनकी मांग है कि शहाबुद्दीन को मिली ज़मानत रद्द की जाए. इसके साथ ही बिहार सरकार ने भी जमानत के खिलाफ अपील कर दी है.

shahabuddin-580x395सिवान के चंदा बाबू के दो बेटों, गिरीश और सतीश को अगस्त 2004 में तेज़ाब से जला कर मार डाला गया था. घटना के चश्मदीद गवाह, तीसरे बेटे राजीव की भी जून 2014 में हत्या कर दी गई. गिरीश और सतीश की हत्या में शहाबुद्दीन को दोषी मान कर उम्र कैद की सज़ा दी गई है. राजीव की हत्या से जुड़ा मुकदमा अभी शुरू नहीं हो पाया है.

मुकदमा शुरू होने में हो रही देरी को आधार हाई कोर्ट ने 7 सितंबर को शहाबुद्दीन को ज़मानत दे दी थी. 2 भाईयों को तेज़ाब से जला कर मारने के मामले में दायर अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उसे पहले ही ज़मानत दे दी थी. इस तरह लगभग 11 साल से जेल में बंद आरजेडी नेता के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया.

वकील प्रशांत भूषण के ज़रिये दाखिल इस याचिका में हाई कोर्ट के फैसले पर कई सवाल उठाए गए हैं. याचिका में शहाबुद्दीन को तुरंत जेल भेजने की मांग की गई है.

याचिका के मुताबिक :
मुकदमा शुरू होने में देरी को आधार बना कर इस तरह के कुख्यात अपराधी को ज़मानत देना गलत था. हाई कोर्ट ने इस बात की पूरी तरह उपेक्षा की कि शहाबुद्दीन के ऊपर लगभग 40 मुकदमे लंबित हैं. इनमें से कई मुकदमे हत्या, अपहरण, रंगदारी, पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने जैसे मामलों से जुड़े हैं.

हाई कोर्ट ने मुकदमा शुरू होने में देरी की एक वजह इस बात को भी बताया कि शहाबुद्दीन सिवान की जगह भागलपुर की जेल में बंद है. कोर्ट ने इस तथ्य की अनदेखी की कि उसे दूसरे ज़िले की जेल में क्यों शिफ्ट किया गया. उसे दूसरी जेल में इसलिए भेजा गया क्योंकि उसके खिलाफ सिवान जेल में रहते हुए स्थानीय पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या करवाने का मुकदमा दर्ज हुआ.

2 भाईयों की हत्या का जुर्म साबित होने के बाद भी उसे ज़मानत मिलना सही नहीं था. हाई कोर्ट ने उसके 10 साल से भी ज़्यादा समय से जेल में रहने को आधार बना कर ज़मानत दी थी. हाई कोर्ट ने इस बात को अनदेखा कर दिया कि उसके खिलाफ कत्ल के कई मुकदमे चल रहे हैं.

जो शख्स जेल में रहते हुए हत्या करवा सकता है, वो बाहर आ कर क्या नहीं कर सकता? सुप्रीम कोर्ट को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए. उसके जेल से बाहर आते ही, इतने दिनों से छुपते फिर रहे उसके तमाम गुर्गों के हौसले बुलंद हो गए हैं.

शहाबुद्दीन याचिकाकर्ता के 3 बेटों को मार चुका है. 69 साल का याचिकाकर्ता अकेले इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है. अब उसे सीधे अपनी जान को खतरा महसूस होने लगा है.

इन दलीलों के साथ चंदा बाबू ने सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना की है कि वो हाई कोर्ट के फैसले पर तुरंत रोक लगाए और शहाबुद्दीन को जेल भेजे. इस मामले में बिहार सरकार की तरफ से अभी तक कोई अपील दाखिल नहीं हुई है.

इससे पहले पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी आशा भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुकी हैं. उन्होंने बिहार में इंसाफ मिलने पर शक जताते हुए, अपने पति की हत्या से जुड़े मुकदमे को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है.

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